पिछले लेख से बकवास का परिभाषा जनते हुऎ अगर कोई बकवास करना चाहता हो तो उसे क्या करना चाहिए? इससे पहले कि मै इस प्रश्न का उत्तर दूँ कृपया मुझे अवसर देँ कि मै बताऊँ कि कौन ऐसे व्यक्ति है जो असल मे बकवास करने के लायक है. शुद्ध हिन्दी मे बोलूँ तो यहाँ यह जरूरी हो गया है कि मै बकवास करने वालोँ के लिए एलिजिबिलीटी क्रायटेरिया (मापदण्ड यानी अर्हता ) फिक्स करुँ. तो चलिए बकवास बाजोँ की योग्यता लिखते है जो निम्न प्रकार से है.
१. पहला मापदण्ड है कि उसे इन्फोसिस मे काम करना चाहिए.
२. दुसरा मापदण्ड है कि उसे आदमी होना चाहिए (औरत नही).
३. तीसरा मापदण्ड है कि उसे बुद्धिमान होना चाहिए
४. चौथा मापदण्ड है कि उसे साहसी होना चाहिए.
५. पाँचवाँ मापदण्ड है कि उसे आवारागर्दी मे गहन आस्था होना चाहिए.
७. छठा माप्दण्ड है कि उसके जीवन का लक्ष्य वह नही कोई और तय करे.
अब चलिए एक एक पोइन्ट का विश्लेषण करेँ:
इन्फोसिस, आदमी, बुद्धिमान, साहसी, आवारा, लक्ष्य विहीन शब्दो से ताल्लुक रखने वालोँ को हम बकवासवाजोँ की श्रेणी मे रख सकते हैँ. लेकिन मै समझता हूँ यह दुनियाँ अपवादोँ से भरा पडा़ है और जो बकवासबाज अपने अन्दर ये गुण नही पाते हैँ तो समझ लीजिए कि आप या तो इतनी काबीलियत नहीँ रखते हैँ या आप अपवादित हैँ. चलिए अब इन्फिसिस ही क्योँ ?? क्या दुसरे जगह काम करने वाले इतने खुशनसीब नहीँ हैँ... अजी मियाँ... बकवास करने के लिए टाईम चाहिए और दूसरे कम्पनी आपको यह सुविधा मुहैय्या नहीँ करबाती है तो मैँ इसमे क्या कर सकता हूँ. अपवाद का गुँजाईश इसमे भी बनता है.
अब बात करते हैँ कि बकवास करने के लिए किसी को "आदमी" होना और "बुद्धिमान" होना क्योँ जरूरी है. यदि आप मुझे व्यक्तिगत रुप से जानते हैँ और मेरे इस लेख को एक उत्कृष्ठ बकवास समझ रहे हैँ तो आप समझ ही गए होङे कि बकवासवाजी रुपी साईँस मे बुद्धि की अपनी महत्ता है. और औरत और बुद्धिमानी एक दूसरे का विपरीतार्थक शब्द होते हैँ जिसका दूर दूर तक कोई वास्ता नही है इसिलिए ऐसा लिखना जायज है. तो भाई एक प्रश्न समने आता है... कि औरत और बुद्धिमानी ... दो मे से एक को इस लिस्ट से हँटा दिया जाए. आपका प्रश्न सही है भैय्या... लेकेन ... कुछ व्यक्तिगत मामला है जिसके वजह से मै ऐसा नही लिख पा रहा हूँ. स...स...स्स...स्स..स्स्स... दीवारोँ के भी कान होते हैँ.
साहसी आवारागर्दी और लक्ष्य विहीन सेल्फ एक्सप्लेनेटरी है. इसी लिए मै इसका विश्लेषण नही कर रहा हूँ. जिन महानुभावोँ को यह समझ मे नही आता हो इसी ब्लोग पर टिप्पणी लिखेँ अपके शँका समाधान का मै हर सम्भव प्रयास करूँगा. आपका टिपण्णी वैसे भी जरूरी है इस बक्वास को जारी रखने के लिए. लिखिएगा कैसा लगा आज का बकवास.
नोट:- और यह सब पढ़ने के बाद यदि आपको यह लगे कि मैने अपनी कम्पनी को गाली दिया है तो रुकिये मेरी सफाई सुनते जाइए. वो क्या है कि हमारी कम्पनी किसी के निजी जिन्दगी मे दखल-अन्दाजी नही करते हैँ. ब्लोगिँग किसी का निजी शौक (हौबी) है. हमारे कम्पनी का कहना है कि एक रात के चैन का नीँद मिलियन डालर से बढकर होता है. इसीलिए काम के साथ साथ हमे मनोरँजन का भरपूर मौका मिलता है. और यह ब्लोग क्या है यह आप जानते ही हैँ.
डा. पद्मनाभ मिश्र
Wednesday, June 13, 2007
बकवासबाजी की अर्हरता . . .
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4 comments:
सलाम सर,
कि हाल है…।
आपके बकवास को पढ़कर हम भी कुछ बलवास करने की साहस जुटा पाये…।
मजा आ गया अपने अंदर भी इन अर्हरता को देख पाया…। अच्छा लिखे!!!
haan sir.....bahut badiya likha.....sach bataaun toh main kayal hogaya hun aapke blogs ka.....
खबराइये नहीं, चिट्ठाजगत में हम सब यही कर रहें हैं। इस बकवास की दुनिया में आपका स्वागत है।
आओ डाक्टर शाब, स्वागत है। हमारी बिरादरी भी इधर पाँच साल से यही काम कर रही है। :)
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