Thursday, September 20, 2007

प्रतिभा (पाटिल) का पत्र सोनियाँ के नाम

परम आदरनीय मैडम;

सादर प्रणाम;

मै राष्ट्रपतिभवन मे कुशलपूर्वक रहती हूँ और आशा करती हूँ कि देवी माँ कि कृपा से आप भी कुशलपूर्वक जीवन व्यतीत कर रही होँगी.

आगे बाद समाचार ये है कि मै आपके क्वात्रोची भैया का सारा इन्तेजाम कर दिया है. सी.बी.आई के लोग पहले तो मेरा बात ही नही मान रहे थे, मैने जब उनको खबर पहुँचाया कि इसमे मैडम का पूर्ण सहमति है, तब कहीँ जाकर उनलोगोँ ने सी.बी.आई का रुख आपके क्वात्रोची भैया के लिए ढीला किया. वरना तो इस बार ये लोग उनको भारत मे प्रत्यर्पण करवाने का पूरा मन बना लिया था. अच्छा हुआ कि आपने मुझे समय पर राष्ट्रपति बनाने का निर्णय लिया वरना भगवान जाने आपके भैया का क्या होता.

मैडम, राष्ट्रपति भवन मे मुझे बहुत दिक्कत आती है. वैसे आपके कहे अनुसार यहाँ का स्टाफ मुझे अब नाश्ते मे पोहा का इन्तेजाम कर दिया है. लेकिन क्या है कि मेरे पति अभी तक सिर्फ एक विधायक के पोस्ट पर काम कर र्हे हैँ. यदि मैडम की कृपा हो तो उनको राज्यसभा के लिए निर्वाचित किया जा सकता है. वैसे मैडम जैसा उचित समझें. क्योकि अभी हाल ही मे महारष्ट्र का दौरा जब मेरे पति ने किया था और वहाँ के अधिकारी को ५ कार, एम्बुलेन्स और नाश्ते मे पोहा आ अरेन्ज्मेन्ट करने के लिया उन्होने लिखा था तो विपक्षी पार्टी उनका यह कहकर बदनामी किया था कि वे तो सिर्फ एक विधायक हैँ इतनी खातिरदारी कैसे सम्भव है. है. मैडम शासन चलाना तो कोई आपसे सीखे. मैने भी एक गुड़ आपसे सीखा. वो क्या है मैडम कि जैसा कि आपने देखा होगा मै भी आपकी तरह सिर पर पल्लू रखने का नाटक शुरु कर दिया है, मुझे बहुत अच्छा लगा आपका यह स्टन्ट जनता बहुत आसानी से बेवकूफ बन जाती है, और हमे बाहबाही फ्री मे मिलता है. इसी तरह का कोई और नुश्खा हो तो पत्रोत्तर के माध्यम से सूचित कीजिएगा.

मैडम लेकिन मै यहाँ राष्ट्रपति भवन मे संतुष्ट नही हूँ. वो क्या है कि हमारे जो भूतपूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम थे ना, वो पूरे राष्ट्रपति भवन का माहौल खराब करके चले गये. स्टाफ लोग बदतमीज हो गये. मुझे तो कभी कभी लगता है कि इससे अच्छा तो हम राजस्थान के राजभवन मे ज्यादा खुश थे. यहाँ के स्टाफ रोज शाम को मुझे ई.मेल चेक करने को बोलते हैँ. बताईये इस उमर मे हम ई-मेल चेक करेँ. और बाप रे बाप आजकल के बच्चे भी कितना बदमाश हो गये हैँ. ई-मेल से ही फालतू का प्रश्न पुछते रह्ते हैँ. अभी कल ही एक स्कूल का बच्चा ई-मेल से पूछा कि मैडम आप डा. अब्दूल कलाम के सपनो का विकसित भारत बनाने मे क्या योगदान करना चाहती हैँ. अब मै क्या जवाब बताउँ. स्टाफ पुछने आते हैँ कि इस ई-मेल का जवाब क्या होना चाहिए. वैसे तो मन करता है कि बता देँ भारत विकसित करे चाहे नही, हमारा क्या जाता है, या सोनिया मैडम का ही क्या जाता है?, लेकिन मै तो राष्ट्रपति के पद पर हूँ और डर लगता है कि इससे तो सोनिया मैडमे का बदनामी होगा ना, इसीलिए चूप रह जाती हूँ. बताईए, अब्दुल कलाम जैसे आदमी को राष्ट्रपति बनना चाहिए ? स्टाफ तो स्टाफ आम आदमी का भी हिम्मत हो जाता है भारत के राष्ट्रपति से डाइरेक्ट सवाल पूछने का? उन्होने सबका मन बढ़ा कर रख दिया है.

अभी हाल के दिनो मे बिहार मे बाढ की स्थिति से निपटने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार हुआ था. कोई बिहारी मुझे ई-मेल कर दिया कि उस सेमिनार के उद्घाटन के लिए मै जाउँ. और यहाँ के स्टाफ हैँ कि मुझे बिहार जाने के लिए जिद्द कर रहे थे. लेकिन मै भी मैडम का पक्का भक्त ठहरा. सो स्टाफ को बोल दिया, कि नही जाऊँगी. मेरे नही जाने से हो ना हो नीतिश कुमार की बदनामी होगी. और उससे लालू यादव को बाहबाही मिलेगा. और लालू यादव तो ठहरे अपने ही आदमी. मैने स्टाफ को समझाया कि लालू यादव की खुशी मे सोनिया मैडम की खुशी है और सोनिया मैदम की खुशी मे ही मेरा खुशी है. हार कर स्टाफ लोगो को मेरा बात मानना पडा. मैडम शुरु मे तो स्टाफ लोग इतने बदतमीज थे कि मुझे रात मे थोडा बहुत पढाई करने के लिए बोलते थे. अपना भाषण खुद तैयार करने के लिए बोलते थे. अगले महीने के बजट मे राष्ट्रपति भवन के लाईब्रेरी मे कौन सा बुक लाना है, मुझे बताने के लिए बोलते थे. मैने उनको बोल दिया देखो हम कोई विद्यार्थी नही हैँ कि हम राष्ट्रपतिभवन मे पढाई करेँ. जन विद्यार्थी जीवन मे पढाई नही किया तो अब कौन सा पढाई करुँगी? आप ही बताईये ने सोनिया मैडम अब्दुल कलाम ने यहाँ का कितना माहौल खराब कर दिया है. मै धीरे धीरे कोशिश कर रही हूँ की माहैल सामन्य हो जाए.

लेकिन मैडम से एक अनुरोध है कि आप अगली बार किसी भी कीमत पर अब्दुल कलाम जैसे लोगोँ को राष्ट्रपति नही बनाएँ. इस तरह के लोग सारा माहौल खराब करके रख देतेँ हैँ.

पुनश्च: मुझे एक ही चिन्ता सताए जा रही है. मुझे कुछ विश्वत सूत्रोँ से पता चला है कि बँगलोर मे बैठा एक ३० साल का एक लडका सबकी बाट लगाने की सोच रखा है. इस क्रम मे अपने "मेरा बकवास" नामक ब्लोग पर सबका मीट्टी पलित करना शुरु किया है. मैडम से अनुरोध है कि इस पत्र को लीक होने से बचाने का भरसक प्रयास करेँ, अन्यथा इस बार वह हमारी बाट जरूर लगाएगा.

7 comments:

Isht Deo Sankrityaayan said...

अब तो लीक होइए गया न! अब का करिएगा. लेकिन पदभंनाभ बाबू बधिया होता कि ई चिठिया आप तनी सा मराठी का टोन देके राजस्थानी टच वाली हिंदी में लिखे होते. ई त आप बिहारी टोन में लिख दिए. ऐसा लग रहा है जैसे ई वर्त्तमान नहीं भावी राष्ट्रपति के चिट्ठी हो. भावी राष्ट्रपति माने बूझे न! अरे ऊहे, अपनी राबडी भौजी.

गिरीन्द्र नाथ झा said...

साहेब मजा आ गया.....कहें तो दिल बाग-बाग हो गया कमाल का लिखा है जनाब आपने.....
आप हैं तो इंजीनियर ना...........लेकिन खबरें बनाकर-लिखकर जिंदगी बसर करने वालों का आप कान काट रहे है.....
बधाई.धांसु चिट्ठी के लिए..
गिरीन्द्र नाथ
09868086126
दिल्ली

Harpreet said...

For the writer

Can you write in English?

I like your writings and comments. If you interested I can give you a bigger market of readers…
Drop me a line..
harprt@gmail.com

jay said...

भाई वाकई मज़ा आ गया| तबीयत खुश हो गयी|बड़ा अफ़सोस होता है की जिस कलाम ने देश के लिए इतना किया देश उनके लिए कुछ ना कर सका

संजीव कुमार सिन्हा said...

सोनिया देश और कांग्रेस को तोडने में जुटी है। सोनिया हटाओ-देश बचाओ-कांग्रेस बचाओ।

पुनीता said...

मिश्र जी, आपने तो कमाल कर दिया. सेंस आँफ हुयमर आपका कमाल का है. मैं भागलपुर के लोगों का सेंस ऑफ हुयमर तो जानती थी पर आप का भी कमाल का है.
वैसे राजनीति कोई हँसी ठठका नहीं है औऱ यह सब के बूते की भी चिज नहीं है. मैं मानती हूं कि राजनेता सबसे ज्यादा भ्रस्ट हैं पर आज के समाज में कौन भ्रस्ट नहीं बन जाता जब भी उसे मौका मिलता है. सीधी सी बात है अगर मुझे कोई लाख रुपए मेरे घर आकर दे जाएगा तो मैं तो सहर्ष स्वीकार करुँगी. तो यह है आम आदमी की सोच. तो ऐसा हम कैसे सोच लेते हैं कि हमारे राजनेता ऐसा नहीं करेंगे.
गंदगी समाज में है औऱ वह हमेशा ही रहेगी बस इस गंद का ढेर ना लग जाए ऐसा हमेशा प्रयास करना चाहिए.
मेरी बात से आप पूरी तरह से असहमत होंगे ऐसा मेरा पूर्ण विश्नास है. राजनेता, मीडिया सब एक ही थाली के चट्टे बट्ट्े हैं. इनपर बहस कर के कोई फायदा नहीं.

Adyanand said...

pappu babu
khub khush rahu, tarrakki karu ,dandanait rahu. aangur key tapar tapar kara sa nahi roku.aahan engineer lokani hi ehi samaj sarkar wa deshak marrammat, mane thik thak ka sakait chhi.
mon prassann wa gadgad achhi ahak sabddak barshat sa.
anjha